नारायण बलि पूजा कौन कर सकता है?
गरुड़ पुराण स्पष्ट कहता है कि “हित चाहने वाले पुत्र, पौत्र और सपिंड (निकट रक्त-संबंधी)” को लोकगर्हा से बचने के लिए नारायण बलि करनी चाहिए — यह वह आध्यात्मिक निंदा है जो परिवार पर तब आती है जब किसी पूर्वज की असामान्य मृत्यु हो और उसे मुक्त न किया जाए। पुत्र उपलब्ध न हो तो क्रम पौत्र, प्रपौत्र, पत्नी, बेटी, बेटी का पुत्र (दौहित्र), भाई और अन्य सपिंड संबंधियों तक जाता है। यदि कोई परिवारजन अनुष्ठान नहीं कर सकता, तो योग्य वैदिक पंडित दिवंगत व्यक्ति और गोत्र का नाम लेकर औपचारिक संकल्प के माध्यम से परिवार की ओर से इसे कर सकता है। हम परिवारों की ओर से नारायण बलि नियमित रूप से कराते हैं — व्यक्तिगत उपस्थिति में भी और NRI परिवारों के लिए दूरस्थ व्यवस्था से भी।
नारायण बली कराना है?
हमारे अनुभवी पंडित भारत के पवित्र स्थलों पर वीडियो प्रमाण के साथ प्रामाणिक अनुष्ठान कराते हैं।