ओड़िया श्राद्ध उत्तर भारतीय पिंड दान विधि से कैसे अलग है?
मुख्य वैदिक मंत्र और पिंड अर्पण की विधि सभी परंपराओं में समान रहती है, लेकिन ओड़िया परिवार उत्कल ब्राह्मण पद्धति के कुछ विशिष्ट आचारों का पालन करते हैं। प्रमुख अंतर हैं: महालया अमावस्या को विशेष महत्व दिया जाता है (व्यक्तिगत तिथि श्राद्ध से भी अधिक), दशाह (मृत्यु के बाद 10-दिवसीय विधियां) ओड़िया पंजीका कैलेंडर के अनुसार चलता है, और पूर्वी ओडिशा के कुछ क्षेत्रों के परिवार वैष्णव आह्वान-क्रम के बजाय शैव आह्वान-क्रम का पालन कर सकते हैं। प्रयागराज में हमारे ओड़िया-भाषी पंडित जी उत्कल पद्धति में प्रशिक्षित हैं और आपके परिवार की परंपरा के अनुसार ही विधि कराते हैं।
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