क्या ज्येष्ठ पुत्र न होने पर कोई अन्य परिवारजन द्वादशी श्राद्ध कर सकता है?
हाँ, यदि ज्येष्ठ पुत्र उपलब्ध न हो, असमर्थ हो या विदेश में रहता हो, तो परिवार का कोई अन्य सदस्य द्वादशी श्राद्ध कर सकता है। धर्मशास्त्र में सामान्य क्रम इस प्रकार माना गया है: ज्येष्ठ पुत्र, अन्य पुत्र, पौत्र, पत्नी, बेटी, बेटी का पुत्र, भाई, भतीजा या संन्यासी के मामले में विश्वसनीय शिष्य। मूल आवश्यकता सच्ची श्रद्धा और योग्य पंडित का मार्गदर्शन है। इसलिए जहाँ ज्येष्ठ पुत्र उपस्थित न हो, वहाँ विधि रुकती नहीं है।
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