त्रयोदशी श्राद्ध कम आयु में दिवंगत बच्चों से विशेष रूप से क्यों जुड़ा है?
त्रयोदशी श्राद्ध कम आयु में दिवंगत बच्चों से विशेष रूप से जुड़ा है क्योंकि हिंदू शास्त्र ऐसे बालक या बालिका की आत्मा को भी आध्यात्मिक सहायता की आवश्यकता मानते हैं, जिसकी जीवन-यात्रा पूरी होने से पहले ही मृत्यु हो गई हो। गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि उपनयन या विवाह से पहले दिवंगत हुए बच्चों के लिए अलग प्रकार की विधियाँ आवश्यक हो सकती हैं। त्रयोदशी तिथि कामदेव से जुड़ी मानी जाती है और इच्छा-पूर्ति की ऊर्जा रखती है, इसलिए यह युवा आत्मा की अधूरी यात्रा को शांत करने में सहायक मानी जाती है।
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