मुख्य बिंदु
इस लेख में
मासिकम क्या है?
मासिकम (Masikam) तमिल हिन्दू परिवारों द्वारा मृत्यु के पश्चात् पहले वर्ष में सम्पन्न किया जाने वाला मासिक श्राद्ध अनुष्ठान है — उत्तर भारतीय परम्परा में जिसे मासिक श्राद्ध कहा जाता है। मासिकम शब्द संस्कृत के मासिक से बना है, जिसका अर्थ है “महीने का”। यह अनुष्ठान उसी चान्द्र तिथि पर — जिस तिथि को परिजन का देहावसान हुआ — लगातार बारह महीनों तक किया जाता है। बारहवें माह के अंत में प्रथम वार्षिक श्राद्ध (आब्दिक श्राद्ध या वर्ष श्राद्ध) के साथ यह क्रम पूर्ण होता है।

कुछ तमिल समुदायों में इस अनुष्ठान को मासिगम (क्षेत्रीय स्वर-भेद के साथ) या मन्थली तिथि भी कहा जाता है। उत्तर भारतीय परम्परा में इसी रीति को मासिक श्राद्ध या मासिकाष्टमी श्राद्ध कहते हैं। उद्देश्य एक ही है: मृत्यु के पश्चात् पहले वर्ष में, जब आत्मा परलोक की ओर यात्रा कर रही होती है, उसे पोषण और सहारा देना। यह यात्रा गरुड़ पुराण में विस्तार से वर्णित है।
मलेशिया, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अन्य देशों में बसे तमिल एनआरआई परिवारों के लिए मासिकम का विशेष महत्त्व है। विदेश में स्वयं यह अनुष्ठान करना — अथवा भारत के किसी पवित्र तीर्थ पर इसे सम्पन्न कराना — आध्यात्मिक रूप से अत्यंत मूल्यवान है। सही मार्गदर्शन से यह व्यवहारिक रूप से पूर्णतः सम्भव भी है।
पहले वर्ष में मासिकम क्यों किया जाता है?
गरुड़ पुराण — हिन्दू मृत्यु-कर्मों का प्रधान शास्त्रीय आधार — मृत्यु के बाद के बारह महीनों में आत्मा की यात्रा का विस्तार से वर्णन करता है। इस प्रथम वर्ष में आत्मा एक संक्रमणकालीन अवस्था में होती है, जिसे प्रेत अवस्था कहा जाता है — पितृ लोक में औपचारिक स्वीकार से पहले की दशा। आत्मा अब भी उस संसार से जुड़ी रहती है जिसे उसने अभी छोड़ा है। वह परिवार के शोक को अनुभव कर सकती है, और अपनी आगे की यात्रा के लिए परिजनों के अनुष्ठानिक सहयोग पर निर्भर रहती है।
हर मासिक मासिकम दिवंगत आत्मा को ये देता है:
- पिंड (चावल का गोला) के अर्पण द्वारा आध्यात्मिक पोषण
- परिवार की प्रार्थना और ब्राह्मण/वाद्यार के मन्त्रों से उत्पन्न पुण्य
- औपचारिक स्मरण और आह्वान — जो आत्मा को सांसारिक बंधनों से मुक्त होने में सहायक होता है
- पितृ ऋण की चुकौती — जिसके द्वारा वंशज अपने पूर्वजों का सम्मान करते हैं
बारह महीने पूर्ण होने के बाद आब्दिक श्राद्ध (प्रथम वार्षिक श्राद्ध) से प्रेत-काल औपचारिक रूप से समाप्त हो जाता है। उस क्षण से आत्मा स्थापित पितृगण में सम्मिलित मानी जाती है, और प्रति वर्ष उसी तिथि पर वार्षिक श्राद्ध करना पर्याप्त माना जाता है। फिर भी कई परिवार हर अमावस्या पर मासिकम-शैली का तर्पण भी जारी रखते हैं — एक अतिरिक्त श्रद्धा-अभिव्यक्ति के रूप में।
मासिकम बनाम वार्षिक श्राद्ध: मुख्य अंतर
| पहलू | मासिकम (मासिक) | वार्षिक श्राद्ध (आब्दिक) |
|---|---|---|
| आवृत्ति | 12 महीने तक हर महीने एक बार | हर वर्ष एक बार, उसी तिथि पर |
| आरम्भ कब | मृत्यु के एक माह बाद (उसी तिथि पर) | मृत्यु के एक वर्ष बाद (उसी तिथि पर) |
| आत्मा की दशा | आत्मा प्रेत अवस्था में (संक्रमण-काल) | आत्मा पितृ लोक में स्थापित |
| अनुष्ठान का स्तर | सरल — तर्पण, पिंड, एक ब्राह्मण भोज | व्यापक — कई ब्राह्मण, गौ दान भी सम्मिलित |
| मुख्य उद्देश्य | संक्रमण-काल में आत्मा को सम्भालना और पोषण देना | वार्षिक स्मरण और निरंतर पोषण |
| क्या ब्राह्मण/वाद्यार आवश्यक है? | हाँ — मन्त्र शुद्ध रूप से उच्चारित होने चाहिए | हाँ — पूर्ण श्राद्ध-कर्म के लिए पंडित अनिवार्य |
मासिकम की विधि: क्या-क्या होता है
मासिकम श्राद्ध-अनुष्ठान की सामान्य संरचना का अनुसरण करता है, मासिक संदर्भ के अनुरूप अनुकूलित। पूरी विधि अपने पारिवारिक वाद्यार के मार्गदर्शन में करनी चाहिए। सामान्यतः अनुष्ठान में निम्न प्रक्रियाएँ सम्मिलित होती हैं:

तैयारी
- हर महीने की सही तिथि पहचानें — वह चान्द्र तिथि जिस पर परिजन का देहावसान हुआ। आपके वाद्यार मृत्यु के समय ही पूरे 12-माह के मासिकम कैलेंडर की गणना कर देंगे।
- कर्ता (ज्येष्ठ पुत्र अथवा नियुक्त पुरुष उत्तराधिकारी) उस दिन एक सरल व्रत रखें या केवल एक बार भोजन करें
- सम्भव हो तो सूर्योदय से पूर्व स्नान करें; स्वच्छ, और अधिमानतः श्वेत वस्त्र धारण करें
- सामग्री जुटाएँ: दर्भ घास, काला तिल, पिंड के लिए चावल का आटा, केले का पत्ता या ताम्र पात्र, ताज़े फूल, घृत-दीप और अगरबत्ती
संकल्प (अनुष्ठान का घोषणा-वचन)
अनुष्ठान का आरम्भ संकल्प से होता है — एक औपचारिक घोषणा जिसमें कर्ता का नाम, गोत्र, वर्तमान तिथि और जिस पूर्वज के लिए यह कर्म किया जा रहा है उनका नाम लिया जाता है। यह संस्कृत में, वाद्यार के निर्देशन में उच्चारित किया जाता है। संकल्प सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्व है — यही औपचारिक रूप से अनुष्ठान का पुण्य उस विशिष्ट आत्मा को समर्पित करता है।
पिंड प्रदान (चावल-गोले का अर्पण)
पके हुए चावल में काला तिल, घी और कभी-कभी मधु मिलाकर तीन पिंड बनाए जाते हैं। ये केले के पत्ते या ताम्र पात्र पर रखी दर्भ घास पर अर्पित किए जाते हैं। वाद्यार पिंड प्रदान का मन्त्र पढ़ते हैं और दिवंगत आत्मा का आह्वान करके अर्पण स्वीकार करने की प्रार्थना करते हैं।
तमिल परम्परा में तीन पिंड बनाए जाते हैं: एक दिवंगत के लिए, एक पितामह के लिए, और एक प्रपितामह के लिए — तर्पण की त्रि-पीढ़ी संरचना के अनुरूप। प्रथम वर्ष के मासिकम में नवदिवंगत के लिए बना मुख्य पिंड विशेष ध्यान का पात्र होता है।
तर्पणम् (जल अर्पण)
पिंड अर्पण के बाद तर्पणम् किया जाता है — काले तिल मिले जल को दक्षिणाभिमुख होकर अंगुलियों के माध्यम से आत्मा और पितृ-वंश के लिए अर्पित किया जाता है। यह विधि मासिक अमावस्या तर्पण के समान ही है (देखें हमारी पितृ तर्पणम् की पूर्ण मार्गदर्शिका)।
ब्राह्मण भोज (वाद्यार को भोजन कराना)
मासिकम का एक प्रमुख अंग है ब्राह्मण (वाद्यार) को पूर्ण भोजन कराना। तमिल परम्परा में यह भोज — श्राद्ध साध्य — केले के पत्ते पर परोसा जाता है, जिसमें चावल, सांभर, रसम, कूट्टू, पायसम और परम्परानुसार अन्य व्यंजन सम्मिलित होते हैं। वाद्यार पूर्वज और समस्त दिवंगत-वंशों के पितरों का प्रतिनिधित्व करते हैं; उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन कराकर परिवार दिवंगत आत्मा तक आध्यात्मिक रूप से प्रत्यक्ष पोषण पहुँचाता है।
विदेश में घर पर मासिकम करने वाले परिवारों के लिए, स्थानीय ब्राह्मण या वाद्यार (यदि समुदाय में उपलब्ध हों) को भोजन कराना उचित है। यदि कोई स्थानीय ब्राह्मण उपलब्ध न हो, तो प्रतीकात्मक भोज किया जा सकता है — साथ में किसी मंदिर या परोपकारी कार्य को दान करने का संकल्प लेकर।
दान (परोपकारी अर्पण)
मासिकम के दिन दान — परोपकारी अर्पण — का विशेष महत्त्व बताया गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार दान को पितृ-कल्याण के तीन स्तम्भों में से एक माना गया है (तर्पण और श्राद्ध के साथ)। उपयुक्त दान वस्तुएँ इस प्रकार हैं: निर्धनों के लिए भोजन, वस्त्र, मंदिर को धन-दान, गौ दान, अथवा मंदिर में दीप-प्रज्ज्वलन का प्रायोजन। इस दान का पुण्य पूर्वज को समर्पित किया जाता है।
मासिकम के लिए आवश्यक सामग्री
| वस्तु | तमिल नाम | मात्रा / टिप्पणी |
|---|---|---|
| पका हुआ श्वेत चावल | सादम | 3 पिंडों के लिए पर्याप्त; बिना नमक के पकाएँ |
| काला तिल | करुप्पु एल्लु | 2-3 चम्मच; पिंड और तर्पण दोनों में प्रयुक्त |
| घी | नेय | 2-3 चम्मच; पिंड में मिलाते हैं और दीप के लिए प्रयोग करते हैं |
| दर्भ / कुशा घास | दर्भ पुल्लु | एक छोटी गठरी; पिंड के नीचे रखी जाती है, तर्पण में भी प्रयुक्त |
| केले का पत्ता | वाष़ै इलै | पिंड अर्पण के लिए |
| ताम्र पात्र (लोटा) | तम्बा पात्रम् | तर्पण के जल के लिए |
| फूल | पुष्पम् | श्वेत फूल अधिमानतः (चमेली, श्वेत कमल, बेलपत्र) |
| अगरबत्ती | अगरबत्ती / सम्ब्राणि | आरम्भ से पहले प्रज्ज्वलित करें |
| दीप (तेल का दीया) | विलक्कु | पूरे अनुष्ठान भर प्रज्ज्वलित रखें |
| मधु | थेन | थोड़ी मात्रा; वैकल्पिक — कुछ परम्पराओं में पिंड में मिलाते हैं |
मासिकम में वाद्यार की भूमिका
वाद्यार (Vadhyar) — प्रशिक्षित ब्राह्मण पुरोहित के लिए तमिल शब्द — मासिकम में मुख्य भूमिका निभाते हैं। परिवार के सदस्य सहायक भूमिका में रहते हैं (सामग्री एकत्र करना, चावल तैयार करना, तर्पण में सहयोग), जबकि वाद्यार संस्कृत मन्त्रों का उच्चारण करते हैं, संकल्प में कर्ता का मार्गदर्शन करते हैं, और परिवार के विशिष्ट सूत्र (आपस्तम्ब, बोधायन आदि) तथा गोत्र के अनुसार सही विधि का अनुसरण सुनिश्चित करते हैं।
तमिलनाडु में अधिकांश परिवारों का अपने पारिवारिक वाद्यार से दीर्घकालिक सम्बन्ध होता है, जो परिवार के कुल, गोत्र और परम्पराओं को जानते हैं। विदेश में बसे तमिल समुदायों के लिए तमिल ब्राह्मण-विधि से परिचित योग्य वाद्यार ढूँढ़ना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मलेशिया में तमिल हिन्दू मंदिरों में अधिकतर शैव पुरोहित होते हैं, लेकिन सब मासिकम के लिए आवश्यक संस्कृत वैदिक विधि में प्रशिक्षित नहीं होते। ऐसी स्थिति में, भारत में किसी योग्य वाद्यार से लाइव वीडियो के माध्यम से अनुष्ठान करवाना — एक पूर्णतः मान्य विकल्प है।
एनआरआई तमिल परिवारों के लिए मासिकम: दूर से कैसे करें
मलेशिया और सिंगापुर में बसे कई तमिल एनआरआई परिवार पूछते हैं: क्या मासिकम विदेश से किया जा सकता है? उत्तर है — हाँ, सही सहयोग से सम्भव है। Prayag Pandits एनआरआई परिवारों के लिए दूरस्थ मासिकम की व्यवस्था इस प्रकार करते हैं:
- मृत्यु तिथि और समय साझा करें: हम सही चान्द्र तिथि की गणना करके आपके लिए पूरे 12-माह का मासिकम कैलेंडर तैयार करते हैं
- पहले से बुकिंग करें: हर मासिक मासिकम तिथि हमारे साथ बुक करें — हम हिन्दू पंचांग के अनुसार सटीक तिथि पर इसे आयोजित करते हैं
- आप संकल्प पढ़ें: उस दिन व्हाट्सऐप या वीडियो कॉल पर जुड़ें — हमारे वाद्यार आपको संकल्प में मार्गदर्शन देते हैं (लगभग 5 मिनट)। यदि समय-क्षेत्र के कारण कठिनाई हो, तो संकल्प एक शाम पहले भी किया जा सकता है
- तीर्थ पर पूर्ण अनुष्ठान: हमारे वाद्यार त्रिवेणी संगम प्रयागराज, वाराणसी या हरिद्वार में पूर्ण मासिकम सम्पन्न करते हैं — पिंड प्रदान, तर्पणम् और ब्राह्मण भोज सहित
- वीडियो रिकॉर्डिंग प्रेषित: आपको पूर्ण अनुष्ठान की वीडियो रिकॉर्डिंग प्राप्त होती है
यह व्यवस्था धर्मशास्त्र के स्वीकृत प्रतिनिधि (प्रॉक्सी) सिद्धान्त का अनुसरण करती है — वाद्यार कर्ता के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं, और कर्ता का संकल्प औपचारिक रूप से उद्घोषित किया जाता है। हमारी एनआरआई के लिए ऑनलाइन तर्पण सेवा भी इसी सिद्धान्त पर आधारित है, और हज़ारों तमिल एनआरआई परिवारों ने विश्वभर में इसका लाभ लिया है।
प्रयागराज और वाराणसी में हमारी श्राद्ध सेवाओं में मासिकम प्रयागराज में श्राद्ध पैकेज के एक भाग के रूप में सम्मिलित है। पूर्ण वार्षिक अनुष्ठान चाहने वाले परिवारों के लिए हम वाराणसी / काशी में श्राद्ध पैकेज भी प्रस्तुत करते हैं — तमिल परम्परा में काशी का मोक्षदायी नगर के रूप में विशेष स्थान होने के कारण यह पितृ-कर्म के लिए विशेष पुण्यदायी मानी जाती है।
पवित्र तीर्थ पर मासिकम करने का महत्त्व
यद्यपि मासिकम घर पर भी पूर्ण विधि से किया जा सकता है, धर्मशास्त्रों में पवित्र तीर्थ पर — विशेषतः नदी संगम या गंगा तीर्थ पर — किए गए अनुष्ठान का गुणित पुण्य बताया गया है। मत्स्य पुराण के प्रयाग माहात्म्य के अनुसार प्रयागराज में किया गया श्राद्ध पवित्र तीर्थों में विशेष पुण्यदायी माना गया है।
प्रथम वर्ष के मासिकम के लिए — जब आत्मा अपनी सबसे संवेदनशील संक्रमण-अवस्था में होती है — त्रिवेणी संगम पर अनुष्ठान करने से दिवंगत तक अधिकतम सम्भव पुण्य पहुँचता है। यही कारण है कि जो परिवार कम-से-कम तीसरे माह, छठे माह और बारहवें माह (आब्दिक) का मासिकम तीर्थ पर करवा पाते हैं, वे अनुष्ठान को उच्चतम स्तर पर सम्पन्न मानते हैं।
पितृपक्ष और श्राद्ध-कर्म का मासिकम से सम्बन्ध समझने के लिए हमारी श्राद्ध कर्म 101: प्रकार, अनुष्ठान और दर्शन पर व्यापक मार्गदर्शिका पढ़ें।
🙏 प्रयागराज या वाराणसी में मासिकम बुक करें
गया तीर्थयात्रा के साथ मासिकम जोड़ने की योजना बना रहे तमिल परिवारों के लिए — जो मुख्य पिंड दान से पहले फल्गु घाट पर मासिक अनुष्ठान करना चाहते हैं — हमारी तमिल परिवारों के लिए गया तर्पणम् और मासिकम मार्गदर्शिका देखें। इसमें गया में मासिकम की व्यवस्था, अय्यर एवं अयंगार पद्धति में अंतर, और चेन्नई से यात्रा सम्बन्धी जानकारी सम्मिलित है।
मासिकम के दिन क्या-क्या ध्यान रखें
औपचारिक अनुष्ठान के अतिरिक्त, तमिल परम्परा में कर्ता और निकट परिजनों के लिए मासिकम के दिन कुछ विशेष आचरण निर्धारित हैं। ये कोई स्वेच्छा-चालित बंधन नहीं हैं, बल्कि पितृ-पूजन के अनुरूप मनोदशा (भाव) — गम्भीर, स्वच्छ, एकाग्र, और दैनिक जीवन के विक्षेपों से मुक्त — को गढ़ने के लिए हैं।
- एक बार ही भोजन करें: कर्ता परम्परागत रूप से अनुष्ठान पूर्ण होने तक उपवास रखते हैं, फिर एक ही भोजन लेते हैं — सादा, शाकाहारी, बिना प्याज़, लहसुन या मांसाहार के। यह भोजन आदर्शतः वही श्राद्ध साध्य होता है जो वाद्यार के लिए तैयार किया गया था, और जिसे वाद्यार के भोजन के बाद परिवार आपस में बाँटकर ग्रहण करता है।
- उत्सव वर्जित: मासिकम के दिन विवाह, उत्सव या उल्लास-समारोह से बचें। यह दिन स्मरण के लिए समर्पित होता है।
- मंदिर दर्शन: कई तमिल परिवार मासिकम के दिन शिव मंदिर अथवा अपने कुलदेवता के मंदिर जाते हैं और दिवंगत की स्मृति में दीप प्रज्ज्वलित करते हैं।
- कौओं को भोजन कराएँ: तमिल और सम्पूर्ण हिन्दू परम्परा में कौओं को पितृ-लोक का दूत माना गया है। भोजन से पहले छत पर या आँगन में कौओं के लिए पका चावल रखना — एक सरल, लेकिन गहरे प्रतीकात्मक अर्थ वाला आचरण है। इसके माध्यम से आप अपने पूर्वजों तक उनके दूतों के द्वारा पोषण भेजते हैं।
- घर में दीप प्रज्ज्वलित रखें: पूजा-कक्ष में दिनभर दीप जलाए रखें। कुछ परिवार सायंकाल (सन्ध्या-दीपम) विशेष रूप से दिवंगत की स्मृति में दीप प्रज्ज्वलित करते हैं।
2026 में मासिकम तिथियाँ: पितृपक्ष और प्रमुख अमावस्याएँ
आपके परिवार में मासिकम की विशिष्ट तिथियाँ देहावसान की तिथि पर निर्भर करती हैं। फिर भी 2026 की कुछ तिथियाँ सभी पितृ-कर्मों के लिए सार्वत्रिक महत्त्व रखती हैं। यदि आपका नियमित मासिकम किसी अन्य तिथि पर भी हो, इन तिथियों पर अतिरिक्त तर्पण करने से गुणित पुण्य प्राप्त होता है:
| तिथि (2026) | अवसर | महत्त्व |
|---|---|---|
| 29 मार्च 2026 | चैत्र अमावस्या | चैत्र मास की अमावस्या — तर्पण के लिए शुभ |
| 27 अप्रैल 2026 | वैशाख अमावस्या | वैशाख की अमावस्या — पितृ-कर्म के लिए प्रबल |
| 26 सितम्बर – 10 अक्टूबर 2026 | महालया पक्ष / पितृपक्ष | 16-दिवसीय पितृ-पखवाड़ा — वर्ष का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण काल |
| 10 अक्टूबर 2026 | सर्व पितृ अमावस्या (महालय अमावसै) | सार्वत्रिक तर्पण — तिथि की चिंता किए बिना सभी पितरों के लिए |
मासिकम का पालन करने वाले तमिल परिवारों के लिए महालया पक्ष काल (26 सितम्बर – 10 अक्टूबर 2026) विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है — इस 16-दिवसीय अवधि में त्रिवेणी संगम प्रयागराज जैसे पवित्र तीर्थ पर मासिकम करना — दिवंगत आत्मा के लिए कई वर्षों के मासिक मासिकम के समतुल्य पुण्य देने वाला माना जाता है।
पितृ दोष और मासिकम न छूटने का महत्त्व
पितृ दोष — पितृ-कर्तव्यों की उपेक्षा से उत्पन्न प्रभाव — को तमिल ज्योतिष और धार्मिक परम्परा में गम्भीरता से लिया जाता है। मृत्यु के बाद के पहले संवेदनशील वर्ष में यदि मासिकम बार-बार छूट जाए, या वर्षों तक श्राद्ध-कर्म न हो, तो अशान्त पूर्वज-आत्मा परिवार के कल्याण में बाधाएँ उत्पन्न कर सकती है। तमिल ज्योतिषी जन्म-कुण्डली में पितृ दोष की पहचान तब करते हैं जब जातक एवं उसके भाई-बहन विवाह में बाधा, सन्तान-प्राप्ति में विलम्ब, या अव्याख्येय स्वास्थ्य कठिनाइयों का सामना करते हैं।
धर्मशास्त्र और तमिल मन्दिर परम्परा दोनों में निर्धारित उपाय एक ही है — निरन्तर, श्रद्धापूर्ण पितृ-पूजन; मासिक तर्पण, प्रथम वर्ष में नियमित मासिकम, और तत्पश्चात् वार्षिक श्राद्ध। यदि प्रथम वर्ष पहले ही बिना मासिकम के बीत चुका है, तो नियमित वार्षिक चक्र पुनः आरम्भ करने से पूर्व क्षतिपूरक त्रिपिंडी श्राद्ध की संस्तुति की जाती है। हमारे पंडित जी परिवारों को इस प्रक्रिया में मार्गदर्शन देते हैं — अपनी स्थिति पर चर्चा हेतु हमसे सम्पर्क करें।
सम्बन्धित विषयों पर पढ़ने के लिए, पितृपक्ष का महत्त्व और पितृ पक्ष एवं श्राद्ध काल में क्या भोजन करें — विषयों पर हमारी मार्गदर्शिकाएँ देखें।
तमिल एनआरआई परिवारों के लिए मासिकम अनुष्ठान बुक करें
मलेशिया, सिंगापुर, अमेरिका, ब्रिटेन और विश्वभर के तमिल हिन्दू परिवार Prayag Pandits के माध्यम से मासिक मासिकम अनुष्ठान (मासिक पितृ अर्पण) की व्यवस्था कर सकते हैं। हमारी सेवा में अपर कर्म परम्परा में अनुभवी तमिल-भाषी पंडित जी सम्मिलित हैं।
- प्रयागराज में मासिक मासिकम (Rs 3,100) — सही तिथि पर त्रिवेणी संगम पर तर्पण + पिंड अर्पण
- वार्षिक श्राद्धम् पैकेज (Rs 5,100) — ब्राह्मण भोज सहित पूर्ण वार्षिक अनुष्ठान
- संयुक्त मासिकम + गया पिंड दान (Rs 11,000) — मासिक अनुष्ठान एवं एक-बार-होने वाली मुक्ति-अनुष्ठान दोनों चाहने वाले परिवारों के लिए
हम अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर और मलेशिया के परिवारों की सेवा करते हैं। सभी अनुष्ठान लाइव वीडियो कॉल, फोटो दस्तावेज़ीकरण और पूर्णता प्रमाण-पत्र सहित आते हैं। तमिल अथवा हिन्दी में सम्पर्क करें व्हाट्सऐप +91 77540 97777 पर।
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