क्या महिलाएँ पितृ दोष निवारण के अनुष्ठान कर सकती हैं?
परंपरागत रूप से, धर्मसूत्रों में निर्धारित विधि के अनुसार, ज्येष्ठ पुरुष वंशज श्राद्ध और पितृ दोष निवारण के अनुष्ठान करते हैं। हालांकि, गरुड़ पुराण और कई स्मृति ग्रंथ महिलाओं को ये अनुष्ठान करने की अनुमति देते हैं, जब कोई पुरुष उत्तराधिकारी न हो या पुत्र उपलब्ध न हो अथवा असमर्थ हो। आज भारत के अनेक क्षेत्रों में बेटियाँ और पत्नियाँ पूर्ण वैदिक मान्यता के साथ नियमित रूप से तर्पण और पिंड दान करती हैं। मुख्य आवश्यकता अनुष्ठान करने वाले का लिंग नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और किसी विद्वान पंडित जी का मार्गदर्शन है।
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