पितृ दोष निवारण कितनी बार करना चाहिए?
पितृपक्ष, हिन्दू पंचांग में पूर्वजों को समर्पित 16-दिवसीय पक्ष (आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर), पितृ दोष निवारण के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। हालाँकि, पूरे वर्ष हर अमावस्या (नए चंद्रमा का दिन) पर तर्पण करने से वार्षिक अनुष्ठानों के बीच पूर्वजों को संतुष्ट रखने में सहायता मिलती है। दिवंगत पूर्वज की मृत्यु-तिथि से मेल खाने वाली विशिष्ट तिथियों पर व्यक्तिगत श्राद्ध करने की भी सलाह दी जाती है। दोष के गंभीर प्रभावों का सामना कर रहे परिवारों को पितृपक्ष की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए—पंडित जी किसी भी उपयुक्त मुहूर्त पर प्रयागराज या गया जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों पर निवारण अनुष्ठान कर सकते हैं।
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