हरिद्वार में तर्पण करने का आदर्श समय कब है?
तर्पण हरिद्वार में कई अवसरों पर किया जा सकता है:
- दैनिक (नित्य तर्पण): परंपरागत रूप से श्रद्धालु हिन्दू अपने प्रातः स्नान के बाद प्रतिदिन तर्पण कर सकते हैं। हरिद्वार जैसे पवित्र स्थान पर ऐसा करना पुण्य बढ़ाने वाला माना जाता है।
- पितृ पक्ष: यह 16-दिन की अवधि पितृ कर्मों के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय है। पितृ पक्ष भर हरिद्वार में प्रतिदिन तर्पण करना अत्यंत अनुशंसित और लाभकारी माना जाता है।
- अमावस्या: प्रत्येक अमावस्या पितृ तर्पण के लिए शुभ मानी जाती है। सर्व पितृ अमावस्या (पितृ पक्ष की अमावस्या) विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
- श्राद्ध के दौरान: तर्पण श्राद्ध कर्म का अनिवार्य भाग है और पिंड दान से पहले किया जाता है।
- सूर्य/चंद्र ग्रहण: ग्रहणों के दौरान विशेष तर्पण किया जा सकता है।
- हरिद्वार आगमन पर: पवित्र नगर की यात्रा किसी भी समय पूर्वजों के लिए तर्पण करने का अवसर है।
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