क्या वाराणसी के अस्सी घाट पर अस्थि विसर्जन किया जा सकता है?
हाँ, अस्सी घाट पर अस्थि विसर्जन किया जा सकता है, हालांकि वाराणसी में यह इस विधि का मुख्य स्थल नहीं है। वाराणसी के प्रमुख दाह संस्कार और अस्थि-विसर्जन घाट मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट हैं — दोनों पुराणिक ग्रंथों में महाश्मशान कहे गए हैं। अस्सी घाट पारंपरिक रूप से स्वच्छ और विस्तृत स्थान माना जाता है, जिसका उपयोग मुख्यतः दैनिक स्नान विधियों, सुबह की प्रार्थना, योग और संध्या गंगा आरती के लिए होता है। फिर भी शास्त्रीय सिद्धांत स्पष्ट है — पारंपरिक श्लोक कहता है कि जिनकी अस्थियाँ, केश या मांस काशी के पवित्र जल में गिरते हैं, वे बड़े पापी होने पर भी स्वर्ग में निवास करेंगे — और यह काशी क्षेत्र के भीतर गंगा में कहीं भी अस्थि विसर्जन पर लागू होता है। कुछ परिवार अस्थि विसर्जन के लिए अस्सी घाट इसलिए चुनते हैं क्योंकि यह मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र की तुलना में कम भीड़ वाला है और अधिक शांत, मननशील अनुभव देता है। असि-संगमेश्वर लिंग की उपस्थिति और काशी की तलवार-सी सीमा के रूप में घाट का रक्षणकारी प्रतीक भी इसे अर्थपूर्ण विकल्प बनाते हैं। यदि आप इसी विशिष्ट स्थान को पसंद करते हैं, तो Prayag Pandits अस्सी घाट पर अस्थि विसर्जन की व्यवस्था कर सकता है।
अस्थि विसर्जन कराना है?
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