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Char Dham & Jyotirlinga

चार धाम और छोटा चार धाम यात्रा में क्या अंतर है?

उत्तर दिया Prakhar Porwal ·

मूल चार धाम (8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित) में बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम् आते हैं — ये चार स्थल भारत की चार दिशाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसे पूरा करना बड़ा संकल्प है, क्योंकि इसमें पूरे देश की यात्रा करनी पड़ती है। छोटा चार धाम (जिसे उत्तराखंड चार धाम या हिमालयी चार धाम भी कहा जाता है) उत्तराखंड के भीतर एक क्षेत्रीय तीर्थ-परिक्रमा है, जिसमें यमुनोत्री (यमुना का उद्गम, देवी यमुना को समर्पित), गंगोत्री (गंगा का उद्गम, देवी गंगा), केदारनाथ (ज्योतिर्लिंग रूप में भगवान शिव और पंच केदार में से एक), और बद्रीनाथ (भगवान विष्णु, जो मूल चार धाम में भी शामिल है) आते हैं। छोटा चार धाम मौसमी यात्रा है (हिमालयी मौसम के कारण May to November) और 10-14 दिनों में पूरी की जा सकती है। यह 19वीं-20वीं शताब्दी में उन भक्तों के लिए भक्तिपूर्ण विकल्प के रूप में स्थापित हुई जो अखिल-भारतीय चार धाम पूर्ण नहीं कर सकते थे। स्कन्द पुराण का केदार खण्ड उत्तराखंड परिक्रमा की प्रशंसा करता है, जबकि पद्म पुराण अखिल-भारतीय चार धाम पर बल देता है। दोनों यात्राएँ मोक्ष के लिए पुण्य देती हैं, पर छोटा चार धाम विशेष रूप से पाप-शुद्धि और पुनर्जन्म से मुक्ति से जुड़ा है।

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