क्या चौथा और उठाला एक ही विधि हैं?
नहीं, चौथा और उठाला अलग-अलग दिनों पर होने वाली अलग विधियाँ हैं, जिनके उद्देश्य भी अलग हैं। चौथा दिन 4 की सामुदायिक बैठक है — सामूहिक शोक की सामाजिक विधि, जहाँ रिश्तेदार और पड़ोसी मृत्यु को साथ मिलकर स्वीकार करते हैं। उठाला, जिसे दसवाँ या दसवें दिन की विधि भी कहा जाता है, दिन 10 से 12 के बीच होता है और इसमें औपचारिक शुद्धि शामिल होती है: मुख्य शोककर्ता और परिवारजन घर के बाहर स्नान करते हैं, शोक के दौरान पहने गए वस्त्र त्यागते हैं, और पुरुष प्रायः मुंडन कराते हैं। उठाला में दसवाँ महत्वपूर्ण पिंड अर्पण भी शामिल है — गरुड़ पुराण, प्रेत कल्प के अनुसार यह वही अर्पण है जो उस आत्मा को पोषण देता है, जो पहली बार भूख अनुभव करने में सक्षम हुई है।
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