यदि ब्राह्मण भोज में ब्राह्मण अपमानित महसूस करें या असंतुष्ट जाएँ तो क्या होता है?
गरुड़ पुराण कहता है कि यदि ब्राह्मण श्राद्ध भोज से असंतुष्ट या अपमानित होकर जाएँ, तो पूर्वज को उस विधि से कोई पोषण नहीं मिलता। आत्मा अपने पाथेय — आगे की यात्रा के आध्यात्मिक प्रावधान — से वंचित रह जाती है और सूक्ष्म लोक में भूख-प्यास सहती है। विश्वामित्र स्मृति जोड़ती है कि यदि निषिद्ध भोजन परोसा गया हो, या ब्राह्मणों का अपमान हुआ हो, तो पूरी विधि का पुण्य पूर्वज तक पहुँचने के बजाय ब्राह्मण को ही लौट जाता है।
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