क्या एक ही यात्रा में नारायण बलि पूजा और पिंड दान साथ कर सकते हैं?
हाँ — प्रयागराज या गया की एक ही यात्रा में नारायण बलि पूजा और पिंड दान को साथ करना न केवल मान्य है, बल्कि गरुड़ पुराण इसे सक्रिय रूप से अनुशंसित करता है। एक ही तीर्थ में, एक ही यात्रा के दौरान दोनों विधियाँ करने से पूरे वंश के लिए लाभ बढ़ता है। प्रयागराज में व्यावहारिक क्रम यह रहता है: दिन 1 सुबह त्रिवेणी संगम पर स्नान और तर्पण; दिन 1 दोपहर नारायण बलि का आरंभ (प्रतिमा तैयारी और प्रारंभिक मंत्र); दिन 2 सुबह नारायण बलि पूर्णता (हवन, ब्राह्मण भोज, विसर्जन); दिन 2 दोपहर संगम या अक्षयवट में पिंड दान। जिन परिवारों को त्रिपिंडी श्राद्ध भी चाहिए, वे उसे दिन 3 पर जोड़ सकते हैं। संयुक्त कार्यक्रम बनाने और bundled price पाने के लिए WhatsApp पर संपर्क करें।
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