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कुंडली में पितृ दोष की पहचान कैसे होती है?

उत्तर दिया Prakhar Porwal · · समीक्षित Aug 12, 2026

वैदिक ज्योतिषी जन्म कुंडली के नवम भाव (पूर्वजों और भाग्य का भाव) में राहु या केतु की सूर्य के साथ युति होने पर मुख्यतः पितृ दोष की पहचान करते हैं। यहाँ सूर्य-राहु की युति इसका सबसे प्रबल संकेत मानी जाती है। इन ग्रहों के साथ शनि की नवम भाव पर दृष्टि होने या वहाँ स्थित होने से दोष अधिक तीव्र माना जाता है। कुछ परंपराओं में नवम भाव में चंद्रमा-राहु की युति और नवमेश पर अशुभ प्रभाव भी देखे जाते हैं। योग्य ज्योतिषी पितृ दोष की पुष्टि से पहले पूरी जन्म कुंडली का विश्लेषण करते हैं, क्योंकि अन्य भावों में ग्रहों की स्थितियाँ इसकी तीव्रता को बदल सकती हैं।

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