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क्या दूसरी मृत्यु वार्षिकी को भी बरसी कहा जाता है?

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नहीं। बरसी शब्द विशेष रूप से पहली मृत्यु वार्षिकी के लिए प्रयोग होता है — पहले वर्ष का आब्दिक श्राद्ध। यही एकमात्र वार्षिक विधि है जिसमें सपिण्डीकरण शामिल होता है, जो आत्मा के प्रेत स्थिति से पितृगण में स्थायी संक्रमण को चिह्नित करता है। दूसरे वर्ष से वही वार्षिक तिथि-विधि वार्षिक पार्वण श्राद्ध कहलाती है। उसकी संरचना भी बदल जाती है: एक आत्मा के लिए निर्देशित एकोद्दिष्ट अर्पण समाप्त हो जाता है, और आगे के सभी श्राद्धों में दिवंगत तीन-पीढ़ी के पार्वण समूह का भाग बनकर सम्मिलित होता है। गरुड़ पुराण यह भेद स्पष्ट करता है — आत्मा पहले ही ऊर्ध्वगति पा चुकी होती है और उसे अब व्यक्तिगत एकोद्दिष्ट विधियाँ नहीं मिलतीं।

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