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उठाला विधि किस दिन की जाती है?

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उठाला विधि सामान्यतः मृत्यु के दिन 10 पर की जाती है, इसलिए इसे दसवाँ भी कहा जाता है। कुछ परिवारों और क्षेत्रों में विधियाँ दिन 10 से 12 तक चलती हैं, जिनमें दिन 11 का वृषोत्सर्ग और दिन 12 के सपिण्डीकरण की तैयारी शामिल होती है। सही समय तिथि, अर्थात चंद्र तारीख, के अनुसार भी बदल सकता है — यदि कोई दिन अशुभ तिथि पर पड़े, तो पंडित जी की सलाह से विधि निकटतम शुभ तिथि पर की जा सकती है। गरुड़ पुराण, प्रेत कल्प दिन 10 को विशेष महत्वपूर्ण मानता है, क्योंकि इसी समय आत्मा के नए पूर्ण सूक्ष्म शरीर में पहली बार भूख और प्यास उत्पन्न होती है।

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