हिंदू शास्त्रों के अनुसार आत्महत्या से मृत्यु के बाद क्या होता है?
गरुड़ पुराण आत्महत्या को दुर्मरण (अप्राकृतिक मृत्यु) का एक रूप मानता है। आत्महत्या से दिवंगत व्यक्ति की आत्मा अंतरिक्ष (वायुमंडलीय क्षेत्र) में अटक जाती है और मृत्यु के बाद की सामान्य यात्रा पूरी नहीं कर पाती। शास्त्र कुछ मानक कर्मों में परिवर्तन बताता है: परिवार पर सामान्य अशौच अवधि का पालन आवश्यक नहीं होता, और सामान्य जल कर्म (उदकक्रिया) नहीं किए जाते। गरुड़ पुराण नारायण बलि को अनिवार्य उपाय कर्म के रूप में निर्धारित करता है। शास्त्र इसे दिवंगत व्यक्ति पर निर्णय नहीं, बल्कि करुणा और कर्तव्य का कार्य मानता है।
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