हिन्दू शास्त्रों के अनुसार अकाल मृत्यु क्या है?
अकाल मृत्यु (शाब्दिक अर्थ “असमय मृत्यु”) उस मृत्यु को कहते हैं जो व्यक्ति की शास्त्रीय रूप से प्राकृतिक आयु से पहले हो जाए। गरुड़ पुराण (प्रेत खण्ड) मृत्यु को काल मृत्यु (पूर्ण जीवन के बाद वृद्धावस्था में समय पर मृत्यु) और अकाल मृत्यु (समय से पहले मृत्यु) में वर्गीकृत करता है। अकाल मृत्यु में ये मृत्यु प्रकार शामिल हैं: दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या, डूबना, आग, सर्पदंश, बिजली गिरना, जंगली पशु का आक्रमण, काला जादू, ब्राह्मण का शाप, अचानक बीमारी, और कोई भी मृत्यु जिसमें शास्त्रीय अंतिम संस्कार ठीक से पूरा न हो सके। गरुड़ पुराण कहता है कि अकाल मृत्यु में दिवंगत आत्माएँ भटकते प्रेत के रूप में वायुमंडल (अंतरिक्ष) में अटक जाती हैं — पितृ लोक तक नहीं बढ़ पातीं और विशेष प्रायश्चित्त कर्म होने तक सामान्य श्राद्ध अर्पण प्राप्त नहीं कर पातीं।