पितृ दोष के अनुष्ठानों में गंगा नदी का क्या महत्व है?
पितृ अनुष्ठानों में गंगा का महत्व अद्वितीय है। पुराणों में वर्णित है कि भगवान शिव की जटाओं से होकर गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरीं और उनमें सभी कर्म-ऋणों को शुद्ध करने की शक्ति है। गरुड़ पुराण में विशेष रूप से कहा गया है कि गंगा के तट पर किया गया तर्पण और पिंड दान पितरों को उच्च लोकों की ओर सीधा मार्ग प्रदान करता है। प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का त्रिवेणी संगम है, इसलिए इसे विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है। गंगा तट पर वाराणसी और हरिद्वार भी इन पितृ अनुष्ठानों के लिए समान रूप से पूजनीय स्थल हैं।
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