नारायण बलि पूजा का शास्त्रीय उद्देश्य क्या है?
नारायण बलि एक प्रायश्चित्त मृत्यु-संस्कार है, जो उन आत्माओं के लिए किया जाता है जिन्हें असामान्य, अकाल या अपूर्ण मृत्यु हुई हो — जिसे दुर्मरण कहा जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु शस्त्राघात, डूबने, अग्नि, सर्पदंश, बिजली गिरने, जंगली पशु के आक्रमण, काले जादू या ब्राह्मण के शाप से होती है, तो आत्मा अंतरिक्ष में भटकती प्रेतात्मा के रूप में अटक जाती है। सामान्य श्राद्ध और पिंड दान के अर्पण ऐसी आत्मा तक पहुँचने से पहले ही आकाश में नष्ट हो जाते हैं। नारायण बलि असामान्य मृत्यु के दोष को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करती है, आत्मा को बाद के पितृ-अर्पण ग्रहण करने की पात्रता देती है, और उसे उत्तमलोक प्राप्त करने में सक्षम बनाती है। नारायण बलि के बिना नियमित श्राद्ध कितना भी किया जाए, असामान्य मृत्यु से गई आत्मा मुक्त नहीं होती।
नारायण बली कराना है?
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