गया में नारायण बलि पूजा कब की जाती है?
गया में नारायण बलि वर्ष भर, 365 दिन, की जा सकती है, फिर भी कुछ समय अधिक शुभ माने जाते हैं:
- पितृ पक्ष: पूर्वजों को समर्पित यह 15/16 दिन की अवधि सबसे प्रभावशाली समय मानी जाती है। (2024 में, पितृ पक्ष अस्थायी रूप से 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक बताया गया है)
- अमावस्या (नया चंद्र), पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र), द्वादशी (12वीं चंद्र तिथि), अष्टमी (8वीं चंद्र तिथि)।
- कृत्तिका, विशाखा, पुनर्वसु आदि जैसे विशिष्ट शुभ नक्षत्र।
- आदर्श रूप से, मृत्यु के 11वें दिन यह किया जा सकता है, पर आवश्यकता उठने या पहचाने जाने पर इसे बाद में भी किया जाता है।
- सामान्यतः इसे ग्रहण के दिनों, एकादशी, अष्टमी और दशमी पर टालना चाहिए। हालांकि कुछ स्रोत अष्टमी को शुभ बताते हैं, इसलिए विधि कराने वाले पंडित जी से स्पष्ट करना उचित है।
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नारायण बली कराना है?
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