हरिद्वार में अस्थि विसर्जन के लिए कौन-सा घाट श्रेष्ठ है — हर की पौड़ी या कनखल?
अस्थि विसर्जन के लिए पारंपरिक तीर्थ पुरोहित कनखल को अधिक उपयुक्त मानते हैं। कनखल का सती कुंड क्षेत्र वही स्थल माना जाता है जहाँ दक्ष यज्ञ में योग-अग्नि द्वारा सती के देह-त्याग के बाद उनका शरीर गिरा था, इसलिए इन जलों में अतिक्रमण और मुक्ति का भाव स्थायी रूप से जुड़ा है। गरुड़ पुराण अस्थि विसर्जन के लिए ऐसे तीर्थों को महत्व देता है, जो दिव्य मुक्ति-घटनाओं से जुड़े हों। हर की पौड़ी सामान्य तीर्थयात्रा और स्नान के लिए शक्तिशाली है, लेकिन उसका मुख्य संबंध पितृ मुक्ति से अधिक जीवित भक्ति से है। हरिद्वार में अस्थि विसर्जन के लिए परिवारों को मार्गदर्शन देने वाले अधिकांश अनुभवी पुरोहित उन्हें हर की पौड़ी के बजाय कनखल सती कुंड ले जाते हैं।
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