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Asthi Visarjan & Immersion

कुरुक्षेत्र और पिहोवा अस्थि विसर्जन के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

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कुरुक्षेत्र-पिहोवा क्षेत्र अस्थि विसर्जन सहित पितृ विधियों के लिए गहरा महत्व रखता है। पिहोवा (प्राचीन पृथुदक), कुरुक्षेत्र से 25 km दूर, सरस्वती नदी के तट पर स्थित है और भारत के सबसे प्राचीन पितृ तीर्थों में से एक है। महाभारत (वन पर्व) के अनुसार राजा पृथु ने पिहोवा में पहली औपचारिक श्राद्ध विधि की थी, जिससे यह पितृ कर्मों के लिए स्थायी पवित्र स्थल के रूप में स्थापित हुआ।

कुरुक्षेत्र का सन्निहित सरोवर — जिसे सात भूमिगत सरस्वती धाराओं का संगम माना जाता है — एक और प्रमुख स्थल है जहाँ अस्थि विसर्जन किया जाता है। वामन पुराण कहता है कि भगवान विष्णु सन्निहित सरोवर के जल में निवास करते हैं, इसलिए यहाँ अस्थि विसर्जन अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

हरियाणा, पंजाब और दिल्ली-NCR के परिवारों के लिए कुरुक्षेत्र-पिहोवा क्षेत्र अस्थि विसर्जन का सबसे सुगम पवित्र गंतव्य है, जहाँ हरिद्वार या प्रयागराज की लंबी यात्रा किए बिना पितृ विधि की जा सकती है।

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