पितृ दोष के अनुष्ठानों में तिल का महत्व क्यों है?
सभी पितृ अनुष्ठानों में तिल का विशेष महत्व है। पद्म पुराण में कहा गया है कि तिल स्वयं भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न हुए हैं, इसलिए वे स्वभावतः पवित्र हैं। वायु पुराण के अनुसार, तिल के साथ पूर्वजों को अर्पित की गई हर वस्तु अमृत रूप में उन तक पहुंचती है। तिल में नकारात्मक ऊर्जाओं को सोखने और अनुष्ठान-स्थल को शुद्ध करने का गुण होता है। तर्पण के दौरान काले तिल को जल और जौ के साथ मिलाकर पूर्वज का नाम और गोत्र बोलते हुए अर्पित किया जाता है—ऐसी मान्यता है कि यह मिश्रण दिवंगत आत्मा को सीधे पोषण देता है।
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