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वाराणसी में श्राद्ध समारोह के मुख्य चरण क्या हैं?

उत्तर दिया Swayam Kesarwani ·

भले ही भिन्नताएँ हों, मुख्य घटक सामान्यतः इस प्रकार होते हैं:

  • संकल्प: पूर्वजों (सामान्यतः तीन पीढ़ियों) के नाम और गोत्र (वंश) के साथ श्राद्ध करने का व्रत लेना।
  • आवाहन: पूर्वजों को उपस्थित होकर भेंट स्वीकार करने के लिए आमंत्रित करना।
  • पिंड दान: पिंड (जौ के आटे, काले तिल, शहद, दूध आदि से बनी चावल की गोलियाँ) अर्पित करना, जो पूर्वजों के सूक्ष्म शरीर का प्रतीक हैं। यह अनुष्ठान का केंद्रीय भाग है।
  • तर्पण: पितरों की तृष्णा शांत करने के लिए काले तिल मिश्रित जल अर्पित करना।
  • ब्राह्मण भोज/दक्षिणा: विद्वान ब्राह्मणों को भोजन कराना या उन्हें खाद्य सामग्री और दक्षिणा (मौद्रिक भेंट) प्रदान करना। ऐसी मान्यता है कि पूर्वज ब्राह्मणों के माध्यम से पोषण ग्रहण करते हैं।
  • पंच बलि: गायों, कुत्तों, कौओं, चींटियों और देवताओं को भोजन अर्पित करना, जो समस्त प्राणियों की परस्पर संबद्धता को मान्यता देता है।
  • प्रार्थना एवं विसर्जन: पूर्वजों की शान्ति और मुक्ति के लिए प्रार्थना करना और उन्हें विदाई देना।

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