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गढ़ मुक्तेश्वर में वार्षिक श्राद्ध कब करना चाहिए?

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गढ़ मुक्तेश्वर में श्राद्ध वर्ष भर किया जा सकता है, लेकिन ये कालखंड सबसे महत्वपूर्ण हैं:

पितृपक्ष (सितंबर–अक्टूबर) — यह 16-दिवसीय पितृ पक्ष पूरे भारत में श्राद्ध के लिए सबसे शक्तिशाली समय है। पितृपक्ष के दौरान दिल्ली, नोएडा, गाज़ियाबाद, मेरठ और आसपास के क्षेत्रों से हजारों परिवार बृज घाट पर श्राद्ध के लिए आते हैं। प्रत्येक तिथि किसी विशिष्ट पितृ के लिए समर्पित होती है — अपने पूर्वज की मृत्यु-तिथि से मेल खाती सही तिथि पर श्राद्ध करने से आध्यात्मिक लाभ अधिकतम माना जाता है।

मृत्यु वार्षिकी (वार्षिक श्राद्ध) — पूर्वज की मृत्यु की वार्षिक तिथि वार्षिक श्राद्ध का प्रमुख दिन है।

अमावस्या — हर अमावस्या तर्पण और श्राद्ध के लिए उपयुक्त है। सोमवती अमावस्या (सोमवार की अमावस्या) विशेष रूप से प्रभावशाली मानी जाती है।

कार्तिक मेला अवधि — गढ़ मुक्तेश्वर का वार्षिक कार्तिक मेला (अक्टूबर–नवंबर) हजारों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है, और इस अवधि में श्राद्ध करना अतिरिक्त पुण्यदायी माना जाता है।

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