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गढ़ मुक्तेश्वर (गढ़ गंगा) श्राद्ध के लिए शुभ क्यों माना जाता है?

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गढ़ मुक्तेश्वर — जिसका शाब्दिक अर्थ “मुक्ति का किला” है — पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे पवित्र गंगा तीर्थों में से एक है। स्कन्द पुराण और ब्रह्म पुराण इसे वह स्थल बताते हैं जहाँ गंगा अपने सबसे शुद्ध हिमालयी स्वरूप में पहली बार मैदानों में प्रवेश करती है, इसलिए इसका जल पितृ विधियों के लिए विशेष प्रभावी माना जाता है।

महाभारत परंपरा में वर्णन है कि महान युद्ध के बाद पांडवों ने कौरव योद्धाओं के लिए गढ़ गंगा में श्राद्ध और पिंड दान किया था। इससे यह स्थल पितृ विधियों का स्थायी तीर्थ बन गया। पास स्थित भगवान शिव को समर्पित मुक्तेश्वर महादेव मंदिर, यहाँ किए गए हर श्राद्ध में शिव की मोक्षदायी कृपा का बल जोड़ता है।

दिल्ली-NCR, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के परिवारों के लिए गढ़ मुक्तेश्वर गंगा-आधारित श्राद्ध का सबसे निकट गंतव्य है — इसलिए हरिद्वार या प्रयागराज की लंबी यात्रा के बिना वार्षिक पितृपक्ष श्राद्ध करना व्यावहारिक हो जाता है।

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