त्रिपिंडी श्राद्ध क्या है और इसे वाराणसी के पिशाच मोचन कुंड पर विशेष रूप से क्यों किया जाता है?
त्रिपिंडी श्राद्ध एक विशेष अनुष्ठान है, जो उन पूर्वजों की शांति के लिए किया जाता है जिनके श्राद्ध कर्म नियमित रूप से नहीं हुए हों (शायद लगातार तीन वर्षों तक), या जिन्होंने अकाल या अस्वाभाविक मृत्यु पाई हो (जैसे दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या)। यह विशेष रूप से पिछली तीन पीढ़ियों के उन पूर्वजों के लिए है जिनकी आत्मा असंतुष्ट अवस्था (प्रेत-योनि) में भटक रही हो। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) का आवाहन किया जाता है और इन आत्माओं की शांति के लिए पिंड अर्पित किए जाते हैं।
वाराणसी का पिशाच मोचन कुंड इस अनुष्ठान के लिए अद्वितीय रूप से शक्तिशाली माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह स्थल गंगा मैया के धरती पर आगमन से भी पहले का है। यहाँ त्रिपिंडी श्राद्ध करने से विशेष रूप से उन आत्माओं को मुक्ति मिलती है जो अकाल मृत्यु के कारण या पिशाच योनि में फँसी हों — उन्हें सद्गति (शांतिपूर्ण गति) प्राप्त होती है। गरुड़ पुराण और स्कन्द पुराण में इस स्थल का महत्व उल्लिखित है। ऐसे विशेष श्राद्ध कर्मों के लिए यह स्थान प्राथमिक तीर्थ माना जाता है।
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