क्या वाराणसी यात्रा में अस्थि विसर्जन के साथ श्राद्ध या पितृ दोष निवारण पूजा की जा सकती है?
हाँ, दूर से आने वाले परिवारों के लिए एक ही काशी यात्रा में अस्थि विसर्जन के साथ संबंधित कर्म करना काफी सामान्य है:
- तर्पण/सरल पिंड दान: यह अक्सर अस्थि विसर्जन के तुरंत बाद किया जाता है।
- वार्षिक श्राद्ध: यदि यात्रा बरसी, तिथि या पितृ पक्ष के समय हो।
- त्रिपिंडी श्राद्ध/नारायण बलि: यदि अकाल मृत्यु वाले पूर्वजों के लिए या छूटे हुए कर्मों के लिए आवश्यक हो। यह अक्सर पिशाच मोचन कुंड में होता है और अलग व्यवस्था चाहिए।
- पितृ दोष निवारण पूजा: पितृ संबंधी दोषों की शांति के लिए की जाने वाली विशेष पूजाएँ।
अपनी आवश्यकताएँ पहले से पंडित जी को बताकर समय-सारणी और व्यवस्था तय करें, क्योंकि अलग-अलग कर्मों के लिए अलग स्थानों, जैसे घाट, पिशाच मोचन जैसे मंदिरों, और अलग तैयारी की आवश्यकता हो सकती है।
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