हरिद्वार में श्राद्ध करने की सामान्य प्रक्रिया क्या है?
हरिद्वार में किसी निर्धारित घाट या नारायणी शिला जैसे मंदिर में पंडित जी के मार्गदर्शन में प्रक्रिया सामान्यतः इस प्रकार होती है:
- शुद्धि: गंगा में पवित्र स्नान करना।
- संकल्प: यह स्पष्ट करते हुए औपचारिक संकल्प लेना कि श्राद्ध किसके लिए किया जा रहा है।
- आह्वान: अर्पण स्वीकार करने के लिए देवताओं और पूर्वजों का आह्वान करना।
- पिंड दान: विशिष्ट पूर्वजों के लिए पिंड (चावल/जौ के आटे, तिल, शहद, घी, दूध से बने गोल अर्पण) तैयार कर अर्पित करना, सामान्यतः पितृ और मातृ पक्ष की तीन-तीन पीढ़ियों के लिए।
- तर्पण: पितृ आत्माओं की प्यास शांत करने के लिए काले तिल मिला जल अर्पित करना।
- पूजा: फूल, धूप आदि से पूजन करना।
- ब्राह्मण भोज / दान: विधि कराने वाले ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा (शुल्क/उपहार) अर्पित करना, क्योंकि ब्राह्मण भोजन को पूर्वजों को तृप्त करने वाला माना जाता है।
क्या यह उपयोगी था?
व्हाट्सऐप पर अगला प्रश्न पूछें
श्राद्ध कराना है?
हमारे अनुभवी पंडित भारत के पवित्र स्थलों पर वीडियो प्रमाण के साथ प्रामाणिक अनुष्ठान कराते हैं।