पितृपक्ष और पितृ कर्मों के समय निर्धारण में कुंडली कैसे उपयोग होती है?
पितृपक्ष के दौरान पितृ कर्मों के सबसे प्रभावी समय और स्वरूप को तय करने में कुंडली की सीधी भूमिका होती है। लग्न कुंडली का 9th भाव पूर्वजों (पितरों) की स्थिति बताता है, जबकि शनि, राहु और केतु की स्थिति यह संकेत देती है कि जातक पितृ दोष लेकर चल रहा है या नहीं। 9th भाव में विशेष ग्रह संयोजन यह पहचानते हैं कि किन पूर्वजों को केंद्रित अर्पण चाहिए और पितृपक्ष में किस तिथि पर उनका श्राद्ध सबसे प्रभावी होगा। हम पूर्ण पितृ दोष कुंडली विश्लेषण प्रदान करते हैं, जो पितृ बाधाओं की सटीक प्रकृति पहचानता है और आपकी कुंडली के आधार पर सही श्राद्ध, तर्पण या पिंड दान बताता है।
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