तुलसी विवाह के दिन तुलसी पत्ते क्यों नहीं तोड़ने चाहिए?
तुलसी विवाह के दिन तुलसी पौधे की दिव्य वधू के रूप में पूजा होती है — महालक्ष्मी का वह अवतार जो भगवान विष्णु से विवाह करता है। इस दिन उनके पत्ते तोड़ना विवाह के दिन वधू को आहत करने जैसा माना जाएगा। इसके अतिरिक्त, शास्त्र कहते हैं कि तुलसी भगवान विष्णु के साथ एकादशी और द्वादशी पर व्रत रखती हैं, जिससे ये दिन ऐसे पवित्र समय बनते हैं जब पौधे को विचलित नहीं करना चाहिए। इसके स्थान पर भक्त पौधे को ताजे फूल, हल्दी, कुमकुम और अखंड अक्षत चावल अर्पित करते हैं। तुलसी विवाह के दिन जो पत्ते पौधे से स्वाभाविक रूप से गिरते हैं, वे अत्यंत पवित्र माने जाते हैं और विवाहोपरांत सुबह की विधि में ब्राह्मणों के साथ प्रसाद रूप में ग्रहण किए जाते हैं।
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