सर्व पितृ अमावस्या (महालया अमावस्या) में क्या विशेष है?
सर्व पितृ अमावस्या (जिसे महालया अमावस्या भी कहा जाता है) पूरे पितृपक्ष की सबसे महत्वपूर्ण तिथि है, क्योंकि यह वह एक दिन है जब सभी पितरों — ज्ञात और अज्ञात, दूर की पीढ़ियों, भूली हुई तिथियों पर दिवंगत हुए पितरों, और जिनके नाम परिवार की स्मृति से खो गए हैं — के लिए श्राद्ध अर्पण स्वीकार माने जाते हैं। शास्त्र कहते हैं कि इस दिन पितृलोक के द्वार पूर्ण रूप से खुलते हैं और पितर अपने जीवित वंशजों से अर्पण ग्रहण करने उतरते हैं। जो परिवार किसी विशिष्ट पूर्वज की मृत्यु तिथि पर श्राद्ध नहीं कर सका, वह सर्व पितृ अमावस्या पर व्यापक “सर्व-पितृ” श्राद्ध कर सकता है। इसी कारण व्यस्त परिवारों के लिए यह सबसे व्यावहारिक रूप से उपयोगी दिन बनता है।
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