कुंडली में पितृ दोष कैसे देखें?
इन स्थितियों को देखें: नवम भाव में राहु या केतु; किसी भी भाव में सूर्य के साथ राहु की युति; शनि द्वारा नवम भाव या उसके स्वामी पर पीड़ा; या नवम भाव का स्वामी षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में होना। द्वितीय संकेतों में पंचम भाव में पाप ग्रह, अत्यधिक पीड़ित बृहस्पति, या चंद्रमा-राहु युति शामिल हैं। शनि और राहु साथ हों तो शापित योग बनता है, जो पितृ कर्म का मजबूत संकेत है। पूर्ण आकलन के लिए योग्य पंडित को इन स्थितियों के साथ पूरी कुंडली और परिवार का श्राद्ध इतिहास चाहिए।
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