प्रयागराज में श्राद्ध करने और घर पर श्राद्ध करने में क्या अंतर है?
दोनों आध्यात्मिक रूप से मान्य हैं, लेकिन शास्त्र स्पष्ट कहते हैं कि पवित्र तीर्थ पर श्राद्ध करने से उसका पुण्य कई गुना बढ़ता है। मत्स्य पुराण विशेष रूप से कहता है कि प्रयागराज (त्रिवेणी संगम) में श्राद्ध पूर्वजों को मुक्ति (मोक्ष) और पुनर्जन्म के चक्र से स्वतंत्रता देता है। घर पर श्राद्ध कर्तव्य पूरा करता है, पर उसमें बढ़ा हुआ तीर्थ-पुण्य नहीं होता।
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श्राद्ध कराना है?
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