संन्यासियों के लिए द्वादशी श्राद्ध क्यों किया जाता है?
संन्यासी, गृहस्थ जीवन का त्याग कर चुके होने के कारण, पारिवारिक तिथियों की सामान्य प्रणाली से जुड़े नहीं रहते। धर्मशास्त्र एकादशी के सर्वोच्च वैष्णव पालन के अगले दिन द्वादशी को संन्यासियों के लिए सबसे उपयुक्त श्राद्ध तिथि बताता है। यह उनके आध्यात्मिक स्तर और सामान्य गृहस्थ चक्रों से उनके अतिक्रमण को स्वीकार करता है।
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