मूलाधार चक्र अवरुद्ध या असंतुलित हो तो क्या होता है?
अवरुद्ध या असंतुलित मूलाधार चक्र शारीरिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक स्तरों पर प्रकट होता है। शारीरिक लक्षण: लंबे समय तक रहने वाला निचली पीठ का दर्द, साइटिका, पैरों में कमजोरी या सुन्नता, कब्ज़ और पाचन समस्याएँ, प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी, अस्थि-घनत्व की समस्याएँ, लगातार थकान, और पैरों व तलवों में खराब रक्त-संचार। भावनात्मक लक्षण: लगातार चिंता और भय (विशेष रूप से जीवन-रक्षा से जुड़े विषय — धन, भोजन, आश्रय), भरोसा न कर पाना, शरीर से कटाव महसूस होना, बेचैनी, संचय करने की प्रवृत्ति, निर्णय लेने में कठिनाई, और मूल सुरक्षा से जुड़ा कम आत्म-सम्मान। आध्यात्मिक लक्षण: आध्यात्मिक रूप से अस्थिर महसूस होना, ध्यान में कठिनाई (तेज़ भागते विचार), प्रकृति या भौतिक संसार से जुड़ाव न महसूस होना, और कहीं भी अपना न लगना। योग उपनिषद बताते हैं कि जब मूलाधार अवरुद्ध होता है, तब कुण्डलिनी शक्ति ऊपर नहीं उठ सकती — स्थिर आधार बने बिना उच्च आध्यात्मिक विकास संभव नहीं होता। उपायों में खड़े होकर किए जाने वाले योगासन (ताड़ासन, वृक्षासन), धरती पर नंगे पैर चलना, LAM मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जप, लाल रंग के वस्त्र या रत्नों का उपयोग, और मेरुदंड के आधार पर केंद्रित grounding meditation शामिल हैं।