स्वाधिष्ठान चक्र क्या है और यह क्या नियंत्रित करता है?
स्वाधिष्ठान चक्र (Sacral Chakra) दूसरा ऊर्जा-केंद्र है, जो नाभि से लगभग चार अंगुल नीचे, सैक्रम के पास स्थित माना जाता है। संस्कृत नाम का अर्थ है स्व का निवास-स्थान (Sva = स्वयं, Adhishthana = निवास/आसन)। षट्-चक्र-निरूपण इसे छह पंखुड़ियों वाले सिंदूरी कमल के रूप में बताता है, जिन पर संस्कृत अक्षर BA, BHA, MA, YA, RA और LA हैं। बीज मंत्र VAM है। अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु (पालनकर्ता) हैं और देवी राकिनी इसकी शक्ति हैं। तत्व अपस् (जल) है। शारीरिक रूप से स्वाधिष्ठान प्रजनन अंगों, गुर्दों, मूत्राशय, निचली पीठ, और शरीर की सभी द्रव-संबंधी प्रणालियों को नियंत्रित करता है। मनोवैज्ञानिक रूप से यह सृजनशीलता, भावनात्मक बुद्धि, कामुकता, आनंद, अनुकूलनशीलता और सुख अनुभव करने की क्षमता को नियंत्रित करता है। संतुलित स्वाधिष्ठान स्वस्थ भावनात्मक अभिव्यक्ति, रचनात्मक प्रवाह, सौहार्दपूर्ण संबंध, और आसक्ति या व्यसन के बिना जीवन का अनुभव करने की क्षमता देता है। तांत्रिक परंपरा में यह चक्र सृजन-शक्ति (शक्ति) का आसन है — वही ऊर्जा जो जीवन रचती है, आध्यात्मिक सृजन के लिए ऊपर की ओर निर्देशित की जा सकती है।