मूलाधार चक्र क्या है और यह कहाँ स्थित है?
मूलाधार चक्र (Root Chakra) हिन्दू योग प्रणाली का पहला और आधारभूत ऊर्जा-केंद्र है, जो मेरुदंड के आधार पर, पेरिनियम के पास स्थित माना जाता है। यह शब्द संस्कृत से बना है: मूल (जड़, आधार) और आधार (सहारा, आधार-स्थान)। षट्-चक्र-निरूपण इसे चार पंखुड़ियों वाले गहरे लाल कमल के रूप में बताता है, जिसकी प्रत्येक पंखुड़ी पर संस्कृत अक्षर VA, SHA, ShA और SA हैं। बीज मंत्र LAM है, जिसे अनुनासिक ध्वनि के साथ बोला जाता है। अधिष्ठाता देवता भगवान ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता) हैं और देवी डाकिनी इसकी शक्ति हैं। तत्व पृथ्वी (Prithvi) है। शारीरिक रूप से यह अस्थि-तंत्र, पैर, पाँव, बड़ी आँत, अधिवृक्क ग्रंथियों और प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करता है। मनोवैज्ञानिक रूप से यह जीवित रहने की वृत्ति, सुरक्षा, स्थिरता, शारीरिक ऊर्जा और पृथ्वी से संबंध को नियंत्रित करता है। मूलाधार वह स्थान है जहाँ कुण्डलिनी शक्ति कुंडली मारे सर्प की तरह सुप्त रहती है — वही ऊर्जा, जो योग और ध्यान से जागृत होकर आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) के लिए सातों चक्रों से ऊपर सहस्रार तक उठती है।