मणिपूर चक्र क्या है और इसे रत्नों का नगर क्यों कहा जाता है?
मणिपूर चक्र (Solar Plexus Chakra) तीसरा ऊर्जा-केंद्र है, जो नाभि क्षेत्र में या उससे थोड़ा ऊपर स्थित माना जाता है। संस्कृत नाम मणिपूर का अर्थ है रत्नों का नगर (मणि = रत्न, पुर = नगर/स्थान) — यह सक्रिय होने पर इस चक्र की उज्ज्वल आभा की ओर संकेत करता है, जिसे चमकते रत्न जैसा माना गया है। षट्-चक्र-निरूपण इसे दस पंखुड़ियों वाले स्वर्ण-पीले कमल के रूप में बताता है, जिसके अक्षर DA, DHA, NA, TA, THA, DA, DHA, NA, PA और PHA हैं। बीज मंत्र RAM है। अधिष्ठाता देवता रुद्र हैं (भगवान शिव का रूपांतरणकारी रूप) और देवी लाकिनी इसकी शक्ति हैं। तत्व अग्नि है। शारीरिक रूप से मणिपूर पाचन तंत्र, पेट, यकृत, पित्ताशय, अग्न्याशय, प्लीहा, और पूरी चयापचय प्रक्रिया को नियंत्रित करता है — यह सचमुच शरीर की वह अग्नि है जो भोजन को ऊर्जा में बदलती है। मनोवैज्ञानिक रूप से यह इच्छाशक्ति, व्यक्तिगत शक्ति, आत्मविश्वास, महत्वाकांक्षा, अनुशासन और निर्णायक कर्म करने की क्षमता को नियंत्रित करता है। वैदिक परंपरा में नाभि की पाचन-अग्नि (जठराग्नि) पवित्र मानी गई है — छान्दोग्य उपनिषद इसे जीवन को धारण करने वाली अग्नि कहता है।