पितृ दोष क्या है?
पितृ दोष वैदिक ज्योतिष परंपरा में एक कर्मजन्य बाधा है, जो तब मानी जाती है जब अधूरे अंतिम संस्कार, उपेक्षित श्राद्ध कर्म या पिछली पीढ़ियों से चले आ रहे अनसुलझे ऋणों के कारण पूर्वज असंतुष्ट रह जाते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार, यह पितृ-ऋण (पूर्वजों के ऋण) के चक्र में व्यवधान के रूप में वर्णित है। जब कुंडली के नवम भाव में राहु सूर्य या चंद्रमा को पीड़ित करता है, तब ज्योतिषी पितृ दोष की पहचान करते हैं। इसके प्रभाव पैतृक पक्ष की सात पीढ़ियों और मातृ पक्ष की चार पीढ़ियों तक माने जा सकते हैं, इसलिए समय पर निवारण आवश्यक माना जाता है।
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