क्या विवाहित बेटी अपने मातामह-मातामही के लिए प्रतिपदा श्राद्ध कर सकती है?
परंपरागत रूप से प्रतिपदा श्राद्ध मातृ पक्ष के ज्येष्ठ पुत्र या पौत्र द्वारा किया जाता है। फिर भी यदि कोई पुरुष उत्तराधिकारी उपलब्ध न हो, तो विवाहित बेटी या उसके पति विद्वान पंडित जी के उचित मार्गदर्शन में यह विधि कर सकते हैं। गरुड़ पुराण और मत्स्य पुराण दोनों श्राद्ध विधियों में यह स्वीकार करते हैं कि सच्ची श्रद्धा लिंग से अधिक महत्वपूर्ण है। आधुनिक व्यवहार में प्रयागराज में कई परिवार तब अपनी बेटियों के माध्यम से प्रतिपदा श्राद्ध कराते हैं, जब पुत्र उपलब्ध न हों या विदेश में रहते हों।
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