हिन्दू योग के अनुसार मानव शरीर में 7 चक्र कौन-से हैं?
सात चक्र मेरुदंड के साथ स्थित ऊर्जा-केंद्र हैं, जिनका वर्णन योग उपनिषदों (विशेषकर योग चूडामणि और शाण्डिल्य उपनिषद्) में मिलता है और तांत्रिक ग्रंथों जैसे षट्-चक्र-निरूपण में विस्तार से किया गया है। आधार से शिखर तक वे हैं: मूलाधार (Root, मेरुदंड का आधार) — अस्तित्व, स्थिरता, पृथ्वी तत्व; स्वाधिष्ठान (Sacral, नाभि के नीचे) — सृजनशीलता, भावनाएँ, जल तत्व; मणिपूर (Solar Plexus, नाभि के ऊपर) — इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास, अग्नि तत्व; अनाहत (Heart, छाती का केंद्र) — प्रेम, करुणा, वायु तत्व; विशुद्ध (Throat) — संवाद, सत्य, आकाश तत्व; आज्ञा (Third Eye, भौहों के बीच) — अंतर्ज्ञान, ज्ञान, तत्वों से परे; सहस्रार (Crown, सिर का शीर्ष) — दिव्य चेतना, मोक्ष। प्रत्येक चक्र का विशिष्ट बीज मंत्र (LAM, VAM, RAM, YAM, HAM, OM, मौन), अधिष्ठाता देवता (ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, ईश, सदाशिव, शम्भु, परमशिव), कमल-पंखुड़ियों की संख्या (4, 6, 10, 12, 16, 2, 1000), और संबंधित शारीरिक अंग व मनोवैज्ञानिक कार्य होते हैं।