गया में तर्पण क्या है?
तर्पण संस्कृत मूल ‘तृप्’ (तृप्त करना) से बना शब्द है। यह हिन्दू धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें देवताओं, ऋषियों और विशेष रूप से दिवंगत पूर्वजों (पितृगण) को जल — प्रायः काले तिल और जौ मिलाकर — अर्पित किया जाता है। गया में तर्पण करने का महत्त्व अत्यंत विशेष माना जाता है, क्योंकि इस स्थान पर पितरों को तृप्त करने और उनकी मोक्ष की यात्रा में सहायक होने का अतुलनीय पुण्य मिलता है — ऐसी पारम्परिक मान्यता है।
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तर्पण कराना है?
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