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हरिद्वार में अस्थि विसर्जन की सामान्य प्रक्रिया क्या है?

उत्तर दिया Swayam Kesarwani ·

यह कर्म सामान्यतः स्थानीय पंडित (तीर्थ पुरोहित) के मार्गदर्शन में होता है और इसमें ये चरण शामिल होते हैं:

  • संग्रह और ले जाना: दाह-संस्कार के बाद अस्थियाँ एकत्र की जाती हैं और सामान्यतः लाल कपड़े से ढके मिट्टी के पात्र (कलश) में रखी जाती हैं। यात्रा के दौरान कलश को सीधे जमीन पर न रखने का ध्यान रखना चाहिए।
  • पवित्र स्नान: कर्म करने वाले परिवारजन सामान्यतः गंगा में शुद्धि-स्नान करते हैं।
  • घाट पर पूजा: पंडित जी चुने गए घाट (जैसे हर की पौड़ी) पर पूजा कराते हैं। इसमें दिवंगत आत्मा की शांति के लिए वैदिक मंत्रों का जप किया जाता है।
  • विसर्जन: अस्थियाँ श्रद्धापूर्वक गंगा की प्रवाहित धारा में विसर्जित की जाती हैं।
  • प्रार्थना और अर्पण: आत्मा की मुक्ति के लिए आगे प्रार्थना की जाती है। कभी-कभी पिंड दान या अन्य अर्पण विसर्जन से पहले या बाद में किए जा सकते हैं।

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