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Asthi Visarjan in varanasi

वाराणसी में मणिकर्णिका घाट की पौराणिक उत्पत्ति क्या है?

उत्तर दिया Prakhar Porwal ·

स्कन्द पुराण के काशी खण्ड, अध्याय 26 के अनुसार, मणिकर्णिका घाट की पवित्र उत्पत्ति भगवान विष्णु और भगवान शिव से जुड़ी है। जब शिव और शक्ति ने काशी को ब्रह्माण्ड का पहला स्थान बनाया, तब उन्होंने विष्णु को शेष सृष्टि बनाने की आज्ञा दी। इस कार्य को पूरा करने के लिए विष्णु ने इसी स्थान पर 500,000 वर्षों तक कठोर तपस्या की और अपने चक्र से एक सुंदर कमल-सरोवर (पुष्करिणी) खोदा, जिसे उन्होंने अपनी भक्ति के स्वेद से भर दिया। जब शिव और पार्वती विष्णु की भक्ति देखने आए, तो शिव इतने भाव-विभोर हुए कि उनका शरीर भाव से कांप उठा। इसी कंपन से उनका रत्नजड़ित कुण्डल — मणिकर्णिका (जहाँ मणि का अर्थ रत्न और कर्णिका का अर्थ कर्णाभूषण है) — उनके कान से गिरकर विष्णु के सरोवर में जा पड़ा। इस पवित्र कुंड का नाम इस प्रकार मणिकर्णिका कुंड पड़ा, और उसके चारों ओर बने घाट ने वही नाम ग्रहण किया। यह उत्पत्ति-कथा विशेष रूप से काशी खण्ड में दर्ज है और घाट के नाम का सबसे अधिक आधिकारिक शास्त्रीय वर्णन मानी जाती है।

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