वाराणसी के घाटों पर अस्थि विसर्जन की सामान्य प्रक्रिया क्या होती है?
प्रक्रिया श्रद्धा और सादगी से की जाती है:
- संकल्प: पंडित जी के मार्गदर्शन में, कर्ता दिवंगत का नाम और वंश बताकर संकल्प लेते हैं।
- शुद्धिकरण: कलश में रखी अस्थियाँ गंगा जल, दूध, और कभी-कभी तुलसी जैसी अन्य पवित्र सामग्री से शुद्ध की जाती हैं।
- संक्षिप्त पूजा: गंगा मैया, भगवान शिव और पितरों से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। फूल और तिल चढ़ाए जा सकते हैं।
- विसर्जन: सामान्यतः दक्षिण की ओर मुख करके, कर्ता पंडित जी के मंत्रोच्चार के बीच अस्थियाँ पवित्र गंगा में धीरे से विसर्जित करते हैं।
- तर्पण: तिल के साथ गंगा जल अर्पित करना (तर्पण) प्रायः इसके तुरंत बाद आत्मा की तुष्टि के लिए किया जाता है।
- गंगा स्नान & दान: कर्ता गंगा में पवित्र स्नान करते हैं, और पंडित जी को दक्षिणा तथा कभी-कभी ज़रूरतमंदों को दान देते हैं।
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