प्रयागराज में तर्पण ठीक कहाँ किया जाता है?
मुख्य और सबसे शुभ स्थान स्वयं त्रिवेणी संगम है – यानी गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम का वास्तविक बिंदु। श्रद्धालु आमतौर पर पास के घाटों से नाव लेते हैं (जैसे किला घाट, सरस्वती घाट, राम घाट) ताकि नदी के बीच संगम बिंदु तक पहुँच सकें, जहाँ पंडित (प्रयागवाल) नाव से ही तर्पण संस्कार कराते हैं। तट के घाटों पर भी अनुष्ठान संपन्न किए जा सकते हैं।
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तर्पण कराना है?
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