गढ़मुक्तेश्वर (गढ़ गंगा) अस्थि विसर्जन के लिए प्रसिद्ध क्यों है?
गढ़मुक्तेश्वर भारत के 14 सबसे पवित्र अस्थि विसर्जन स्थलों में से एक है, जिसकी स्कन्द पुराण और ब्रह्म पुराण में विशेष प्रशंसा मिलती है। “गढ़ गंगा” नाम उस प्राचीन किले (गढ़) से जुड़ा है जहाँ गंगा पहली बार मैदानों में प्रवेश करती है — इसलिए यह गंगा जल की हिमालयी पवित्रता बनाए रखने वाला सबसे पश्चिमी बिंदु माना जाता है। मान्यता है कि राजा भगीरथ ने अपने 60,000 शापित पूर्वजों के लिए पहली बार पितृ कर्म यहीं किया था, यही गंगा अवतरण की कथा है। समीप का मुक्तेश्वर महादेव मंदिर वह स्थान कहा जाता है जहाँ स्वयं शिव ने गंगा को अपने मस्तक पर स्वीकार किया। गढ़ गंगा में अस्थि विसर्जन उत्तर भारत के उन परिवारों के लिए विशेष रूप से शक्तिशाली माना जाता है जो वाराणसी या प्रयागराज नहीं जा सकते — इसका आध्यात्मिक पुण्य समकक्ष माना जाता है।
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