गया पिंड दान के लिए सबसे पवित्र स्थल क्यों माना जाता है?
वायु पुराण, गरुड़ पुराण, वाल्मीकि रामायण और महाभारत जैसे शास्त्र गया को पितृ कर्मों का सर्वोत्तम स्थल बताते हैं। भगवान विष्णु स्वयं गया में गदाधर रूप में विराजमान हैं और उनका चरणचिह्न (विष्णु पद) विष्णुपद मंदिर में प्रतिष्ठित है। भगवान राम ने यहाँ राजा दशरथ के लिए पिंड दान किया था। गया की धरती को असुर गयासुर का शरीर माना जाता है, जिसे विष्णु से यह वरदान मिला था कि यहाँ किया गया हर पिंड दान पूर्वजों को पूर्ण मुक्ति देगा।
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